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बंदा बुनियादी हूँ

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्थर से शीशा टकराकर, ख्वाब सारे चूर हुए,
        
                                                    
                            
शेर-ओ-शायरी से भर दी डायरी,जबसे उनसे दूर हुए
ज़ख्म इतने गहरे मिले कि ज़ख्म सारे नासूर हुए,
दर्द लेकर उनसे, उनकी मोहब्बत में मशहूर हुए।

फरियादी हूँ, सत्यवादी हूँ,
सत्य प्रेम का आदी हूँ।
न वगैरह हूँ, न इत्यादि हूँ,
बात मानो, बंदा बुनियादी हूँ!
18 घंटे पहले
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