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माँ की पवित्र खुशबू

Ambrish Bhardwaj

Mere Alfaz
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                            कभी कभी किसी के
        
                                                    
                            
कंघे (Comb) में वर्षो बाद
उसके जिस्म की
खुशबू आती हैं
वो जिस्म होता हैं
पिता का जो पिता
वर्षो पहले भगवान
के पास चले गए थे,
ये सच हैं पर
इंसान के पंचतत्व में
मिल जाने के बाद भी
उस इंसान का तत्व
धरती पर रहता हैं
वो साथ होता हैं
हर पल कुछ एहसास में
कुछ प्यार में जो देते हैं
हर पल मार्गदर्शन

वो होता हैं मेरे पापा का
तत्व वो तत्व खुश होता हैं
बच्चो को खुश देख कर......
वो तत्व दुखी होता हैं
बच्चो को दुखी देख कर......

उस कंघे के साथ
कुछ और भी कंघे
और तत्वों में तत्व
शामिल होते गए
पर अभी हाल में
२२ सितम्बर को एक
तत्व शामिल हुआ जो
ममतामयी कर्म की देवी
"सत्या" जो “ब्रज मोहन”
की अर्धांगिनी जो मेरी जननी,
जिनकी कोख में पनपा,
जिनकी गोद में खेला था
वो मेरे पापा से
मिली वर्षो के बाद मिली
और पापा के कंघे के साथ
"माँ" का कंघा शामिल हो गया
मेरे अनमोल खजाने में
जो मेरी यादो की खुशबू का
खजाना हैं, मेरी अनमोल पूँजी,

बस जीवन की कहानी
इत्ती सी है
और मेरी भी कहानी
इतनी सी होगी ये में जानता हूँ
क्योकि यही मेरी
ओकात या बजूद हैं...!!!
---ॐ शांति ॐ---
--- Peace ---

- अम्बरीश भारद्वाज
आगरा - उत्तर_प्रदेश

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