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मुक्तक- आवाज देता रहा

Ambika Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परकटे सपनों को परवाज देता रहा।
        
                                                    
                            
आंखों को नित नया काज देता रहा।
वो गया तो फिर लौट कर न आया,
मैं तो बस उसे ही आवाज देता रहा।

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6 वर्ष पहले
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