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मुक्तक- आवाज देता रहा

                
                                                         
                            परकटे सपनों को परवाज देता रहा।
                                                                 
                            
आंखों को नित नया काज देता रहा।
वो गया तो फिर लौट कर न आया,
मैं तो बस उसे ही आवाज देता रहा।

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6 वर्ष पहले

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