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क्रोध

Amarnath Jaiswal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ललकार दिया अंगारों को भड़काई तुमने चिंगारी।
        
                                                    
                            
तुम मौत तमाशा देखोगे अब फूटेगी ना किलकारी।
जल रही चिताओं में देखो शत्रु,दल सब लेटे हैं।
निज हाथों में शमशान समेटें भारत मां के बेटे हैं।

वह ओज तेज के स्वामी है,बारूद बांध कर घूम रहे।
वह वीर बहादुर बैरागी है, प्राण लुटाए झूम रहे।
तुम भूल गये इतिहास हमारे,गढ़े हुऐ हैं सांस हमारे।
भूले हो की भूल गए वह विरोध सभी विद्रोह हमारे।

होती है जयकार उन्हीं की खुद के रहे सहायक है।
मारे नहीं है स्वप्न हमारे, प्रलय के परिचायक है।
उबल रहे है लहू हमारे रक्त बूंद के प्यासे होकर।
लडे लडाई आन बान की वही मेरा रघुनायक है।

कौन मौत को प्यास है जो आज पिनाका टंकारे।
किसके छाती में खून चढ़ा है जो वीरों को ललकारे।
कौन दंभ भरता है,कोई गीदड़ शेर बना होगा।
जब शूरवीर हम कूदेंगे,गीदड़ तो गीदड़ होगा।

बिछें पड़े हैं अंग भंग यह कटे हुए सर वीरों के।
तलवारों की नोक लिखें इतिहास हमारे वीरों के।
एक बार मिलता है जीवन अल्हड़ नई जवानी।
हवन कुंड फिर मांग रही है नई नवेली कुर्बानी।

आन बान पर मर मिटते है उसको धारा पुकारेगी।
खुद को मां का बेटा कहते उसको धारा पुकारेगी।
जब सौतेले आतंक करेंगे,निज बेटे लालकरेगी।
चिंगारी सी आग है जिसमें उसको धारा पुकारेगी।

क्रांतिवीर हे वीर पुत्र तू भगत सिंह का चेरा है।
खेलो जाकर रणभूमि में,ले लो सब कुछ तेरा है।
क्रुद्ध वीर तुम युद्ध करो,हे रुद्र रूप के अवतारी।
हे शूर साहसी वीर बहादुर आवाहन अब तेरा है।

जब ईट बजे,घनघोर बजे,यह सकल देश चहुंओर बजे
बज पड़े बिगुल जब सेना के तब मौत मौत का शोर मचे।
अंगार उठा दो,आग लगा दो,त्राहि-त्राहि सब त्राहि मचा दो।
नहीं संभालती बागडोर तो सेना की सारकार सरकार बना दो।

जिसको चाहो जेल कर दो, जिसका चाहो बेल कर दो।
हिंदू मुस्लिम खूब लड़ा दो, जब चाहो विस्फोट कर दो।
तानाशाह बन बैठे हैं,सब कुछ चलता मनमर्जी का।
कुछ लोगों को नशा चढ़ा है राजनीति के कुर्सी का।

साम्यवाद का लिया सहारा जब जनता सब लुटेगी।
यह कुर्सी सारी टूटेगी जब जनता व्याकुल छूटेगी।
काम छोड़ संसार छोड़ बस नारे गूंज उठेंगे।
हाहाकार मचाये जिस दिन यह मजदूर उठेंगे।

-अमरनाथ जायसवाल।।
2 वर्ष पहले
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