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सरहद के वीरों की दास्तान

Amar Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आग लगी है इस दिल में
        
                                                    
                            
अब तूफानों से क्या डरना
मंजर वो हमने देख लिया
दहशतगर्दों से क्या डरना।

न झुके कभी न झुकना है
पैगाम यह मेरा है तुझको
दुश्मन की अब औकात नही
मिट्टी में मिलना है तुझको

प्रतिशोध की आग जो धधकी है
यह आग न अब बुझ पायेगी
दहलीज पर जाकर ही तेरे
अब मौत की बारिश बरसेगी।

सरहद पर चुपके से तुमने
आतंक का खेल जो खेला था
क्या सोच समझकर आये थे
क्या वीरों का लोहा परखा था?

कफन बांधकर निकला हूं
अब दुनिया तांडव देखेगी
मैदान-ए-जंग अब दिल में बसी
दुश्मन की औकात दफ़्न होगी
– अमर एहसास
12 घंटे पहले
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