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मेरी बर्बादी पर हँसते हो तो हँसते रहो दोस्तो,

Amar Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            महकते फूलों का शहर पसंद है मुझे,
        
                                                    
                            
मासूम चेहरों पर मुस्कान पसंद है मुझे।
मैं दिल से दुआ करता हूँ आप सदा खुश रहे,
क्योंकि खुशहाली का माहौल पसंद है मुझे।।

नफरत के दौर में प्यार का पैगाम पसंद है मुझे,
पंक्षियों की चहचहाहट का संसार पसंद है मुझे।
दिखावे के शोर से दूर शांत बहती नदी की तरह,
अपनों के चेहरों पर खिलता निखार पसंद है मुझे।।

दिखावे की इस धूप से बहुत दूर कहीं,
पेड़ों की छांव जैसा शीतल लम्हा पसंद है मुझे।
लफ्जों के जाल में उलझा नहीं जो मैं कभी,
आँखों से झलकती पावन सादगी पसंद है मुझे।।

मैं ठहरा हूँ अपनी ही जान पर खेलने को,
आपको मंजिल तक पहुँचाना पसंद है मुझे।
मेरी किस्मत का सितारा डूबे तो डूब जाए,
पर आपका नया सवेरा बनना पसंद है मुझे।।

बस यूँ ही महकता रहे इंसानियत का चमन,
वतन में इंसान को इंसान देखना पसंद है मुझे।
न रहे दिलों में कोई भेद न नफरत की दीवार,
हर धड़कन में प्रेम की बौछार पसंद है मुझे।।

मेरी बर्बादी पर हँसते हो तो हँसते रहो दोस्तो,
आपकी खुशी के लिए हर दर्द सहना पसंद है मुझे।
मेरी राहों में चाहे कितने भी काँटे क्यों न हों,
पर हर हाल में आपको खुश देखना पसंद है मुझे।।
-अमर एहसास
एक दिन पहले
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