शहर में रहने के ख़्वाब देखने वाले हम गाँव के लड़के,
हक़ीक़त में अब शहर आ गए हैं।
माँ के हाथों से बना खाना खाने वाले हम,
अब भूख लगने पर मेस में खाने के लिए लाइन लगा रहे हैं।
देख ली हमने शहर की चमक-दमक,
माँ, हम दोबारा तेरे हाथों से खाने गाँव आ रहे हैं।
— अमन यादव