विज्ञापन

गाँव के लड़के

Aman Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहर में रहने के ख़्वाब देखने वाले हम गाँव के लड़के,
        
                                                    
                            
हक़ीक़त में अब शहर आ गए हैं।

माँ के हाथों से बना खाना खाने वाले हम,
अब भूख लगने पर मेस में खाने के लिए लाइन लगा रहे हैं।

देख ली हमने शहर की चमक-दमक,
माँ, हम दोबारा तेरे हाथों से खाने गाँव आ रहे हैं।

— अमन यादव
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7450 कविताएं

View Profile