आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गाँव के लड़के

                
                                                         
                            शहर में रहने के ख़्वाब देखने वाले हम गाँव के लड़के,
                                                                 
                            
हक़ीक़त में अब शहर आ गए हैं।

माँ के हाथों से बना खाना खाने वाले हम,
अब भूख लगने पर मेस में खाने के लिए लाइन लगा रहे हैं।

देख ली हमने शहर की चमक-दमक,
माँ, हम दोबारा तेरे हाथों से खाने गाँव आ रहे हैं।

— अमन यादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर