सादगी के वैभव में सजा, वो अखंड ज्ञान है,
तभी तो युग-युगांतर से, शिक्षक का पद महान है।
उनकी कलम की ताकत से, इतिहास नए बनते हैं,
उनके दिए संस्कारों से ही, उत्तम चरित्र ढलते हैं।
दौलत से ऊँचा दर्जा है, उनकी पावन शिक्षा का,
वे मार्ग दिखाते जीवन को, और लक्ष्य कठिन दीक्षा का।
दुनिया के जितने भी ऊंचे पदों पर बैठे सुल्तान हैं,
वे भी शीश झुकाते वहाँ, जहाँ शिक्षक खड़े महान हैं।
इतिहास गवाह है गुरुओं ने, सत्ता को राह दिखाई है,
अपनी बौद्धिक ताकत से, हर युग में अलख जगाई है।
चाणक्य के प्रखर विचारों ने, इतिहास पलट डाला था,
एक श्रेष्ठ राष्ट्र की नींव को, अपने हाथों संभाला था।
संतोष ही उनका आभूषण, आँखों में अनुपम तेज है,
उनके विचारों के आगे, फीका हर भौतिक क्रेज है।
वह समय के चक्र पर, नया अध्याय लिखता है,
अपनी ज्ञानमयी स्याही से, वो देश का कल बुनता है।
मन में शांति का भाव लिए, वो सहज और पावन है,
जिसकी पावन गोद में ही पलता प्रलय और निर्माण है।
वो झुकता नहीं किसी वैभव के आगे, वो ज्ञान का समंदर है,
भले ही वो सादा दिखे, पर एक पूरा ब्रह्मांड उसके अंदर है।
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