किसी ने कहा, घूम आओ,
ज़िन्दगी से चुरा के कुछ दिन,तरो ताज़ा हो आओ,
पर, मेरा कुछ हिस्सा वहां छूट जायेगा,
ये किसी ने नहीं बताया..
दरिया के पानी में मेरे पैरों के निशान छूट गए,
उस नम हवा में मेरी बेफिक्रीयाँ छूट गयी,
और छूट गाया अपनों के साथ बिताया वो वक़्त...
अब लगता है, उस हिस्से की तलाश में,
फिर से वहीं जाना पड़ेगा...
जाने वो हिस्सा मिलेगा, या कुछ और छूट जायेगा.
-अलका पटावरी