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निडर होकर बढ़ाओ कदम

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निडर होकर बढ़ाओ कदम ,
        
                                                    
                            
सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी।
बढ़ाकर कदम कभी पीछे न देखो ,
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।

निडर होकर मीरा ने ,
कदम निकला था महलों से।
साथ में मूरत गिरधर थी ,
साथ में संग सहेली थी।

राणा ने बहुते त्रास दिये ,
पर मीरा हुई निराश नहीं।
राह में बहुते कष्ट मिले,
पर पीछे मुड़कर देखा नहीं।

पीछे मुड़कर देखा न था ,
जब ब्रह्म कमण्डल से गंग चलीं
शिव के रोके नाहिं रुकी ,
जब वेग से गंग हहरात चलीं।

-अशर्फी लाल मिश्र ,कानपुर देहात

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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