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मेरे अल्फाज़

निडर होकर बढ़ाओ कदम

AL Mishra

46 कविताएं

255 Views
निडर होकर बढ़ाओ कदम ,
सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी।
बढ़ाकर कदम कभी पीछे न देखो ,
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।

निडर होकर मीरा ने ,
कदम निकला था महलों से।
साथ में मूरत गिरधर थी ,
साथ में संग सहेली थी।

राणा ने बहुते त्रास दिये ,
पर मीरा हुई निराश नहीं।
राह में बहुते कष्ट मिले,
पर पीछे मुड़कर देखा नहीं।

पीछे मुड़कर देखा न था ,
जब ब्रह्म कमण्डल से गंग चलीं
शिव के रोके नाहिं रुकी ,
जब वेग से गंग हहरात चलीं।

-अशर्फी लाल मिश्र ,कानपुर देहात

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