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होली की मस्ती

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फागुन में खिले टेसू के फूल।
        
                                                    
                            
फूलों में सुन्दर टेसू के फूल।।
फागुन की हवा अकड़ते अंग।
सबको चढ़ता होली का रंग।।
दादी थिरक रहीं अंगना में।
दादा मारें रंग पिचकारी।।
बिटवा ढोल बजाय रहे।
बहुवें थिरकें दे तारी।।
पोता पोती रंग उड़ायें।
उछलें दै दै तारी।।
घर-घर बाजे ढोल मजीरा।
घर-घर उत्सव भारी ।।


अशर्फी लाल मिश्र 
कानपुर देहात

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