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तुम और तुम्हारा कंधा

Akhilesh Joshi 'Anpadh'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी राह में कोई साथ चले,
        
                                                    
                            
कभी हाथों में कोई हाथ मिले,
पर जब जीवन की साँझ ढले,
अक्सर अपने ही साथ मिले।

जब मन भारी हो, आँखें नम,
और सुनने वाला कोई न हो,
तब सिर रखने को याद रहे—
अपना कंधा भी कम नहीं।

दुनिया साथ रहे न रहे,
रिश्ते पास रहें न रहें,
हर मोड़ पर इतना याद रहे—
तुम हो… और तुम्हारा कंधा है।

जो हर बोझ तुम्हारे संग चला,
हर चोट में चुपचाप खड़ा रहा;
जब भी सहारे की ज़रूरत हो—
याद रखना,
तुम हो… और तुम्हारा कंधा है।
- अखिलेश जोशी ‘अनपढ़’
एक घंटा पहले
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