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ऑपरेशन सिन्दूर

Akhil Dadhich

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूं तो हम हैं सौम्यता के परिचायक मानत है बुद्धा को
        
                                                    
                            
गर कोई छेड़े हमें तो ना भूले राणा के वंशज हैं हम
इतनी है हिम्मत हममें कि पताल फोड़ नीर निकाले
जम्बू द्विपे भारत खण्डे को जो सम्पूर्ण था हमने जो पाया
ख़ुशी-ख़ुशी उनकी खातिर हमने अपना शरीर गवाया
ये पर न अब तक वो नापाक पाक समझ अभी है पाया
बस केवल समझाने की खातिर हमें बर्मा था जो बनवाया
नासामझ नपुंसक नापाक तब भी समझ नहि था पाया
कायरता से कारगिल मे वापस भेड़िया माफिक घुस आया
भारत के शूरो ने पुनर कारगिल मे वापस था उसको समझाया
पर अपनी फितरत से मजबूर आम जन पर गलत जोर दिखाया
पर भूल गया कि अबकी बार वो नव भारत से गलत है टकराया
बार बार कि गंदी भूलो अब ना वापस फिर ना दोहरने हम देंगे
जानो आकाश राफेल विक्रांत विराट ना दिखलाने को है बनवाया
सेना के सब अंगो को जोड़ हमने आपना जौहर फिर दिखलाया
जो सिन्दूर उजाडे कायरता से चुपके जन्नत की घाटी में उसने
खौल उठा लहु नसो मे तो हमने ब्रह्मोस आकाश यहि से है दागा
हर कोना जर्रा जर्रा नापाक उस धरती का थरयाया अग्नि की लपटों से
सपनों में भी उनके आकाश राफेल का भयानक रूप सपनो मे छाया
बर्बादी से बचने को धरती क कोना कोना अब डर के मारे उसने नापा
पर भारत कि शूरवीर बेटो के रौद्र रुप से अखिल जगत भी जो घबराया
सबने हाथ जोड़ पाक के ना होने से इन शूरो को शांति का प्रस्ताव पहुचाया
मानवता कि खातीर भारत ने पुनर जो अपना विशाल हृदय को दिखलाया
संग चेतावनी समझाया गर ना मना तो हस्ती ही मिट जाएगी यह जतलाया
नमन है इन शूरवीर सैनिक को जो पुनर माथे पर जीत का सेहरा सजवाया
एक वर्ष पहले
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