विज्ञापन

हाइकु कविताएं

Ajayvir Singh Verma KAFAS

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            1.
        
                                                    
                            

धूप में खड़ा
सूखा तन्हा पेड़ था
मेरी तरह


2.

मेरी तरह
रात जागती रही
चाँद न आया


3.

चाँद न आया
आँखें ताकती रही
सुबह तक


4.

सुबह तक
रोज़ की तरह
अंधेरा छाया


5.

अंधेरा छाया
काली काली घटाएँ
बरसात में


6.

बरसात में
मिट्टी मिट्टी हो गयी
सारी सड़क


7.

सारी सड़क
भीड़ जमा हो गयी
अर्थी निकली


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile