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किसने किसके आँसू देखे

Ajay Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसने किसके आंसू देखे कौन किसका ग़म जिया
        
                                                    
                            
हम सिसकते रह गए और ज़माना हंस दिया।

मुस्कुरा के जीया था, मैं जो चार पल
उस ख़ुशी ने मुझको बेबस कर दिया।

मंज़िल मेरी कुछ भी नहीं, फिर भी है कुछ
नाम जिसके मैंने सब कुछ लिख दिया।

ज़िंदगी से वाक़िफ़ मैं अपनी कब ना था
अनजान मेरा नाम क्यूँ कर रख दिया

तारीफ़ के क़ाबिल नहीं हो, ऐ अश्क़ तुम
तनहा दिलों का फिर भी है तुमने संग दिया।
एक महीने पहले
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