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छुप गया चाँद रात बाकी है

Ajatshatru Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहर में एहतियात बाकी है
        
                                                    
                            
छुप गया चाँद रात बाकी है ।

लूट गया दिन में अस्मत देखो
कहां लोगों में जज़्बात बाकी है ।

यहां खत्म हो गए नज़ारे सब
कहने को जमाने की बात बाकी है ।

चारों ओर पसरा हुआ अंधेरा है
बिगड़ना अब भी हालात बाकी है ।

मर गई कब की इंसानियत ठाकुर
निकलना जनाजे की बारात बाकी है ।
-अजातशत्रु सिंह
 
एक महीने पहले
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