शहर में एहतियात बाकी है
छुप गया चाँद रात बाकी है ।
लूट गया दिन में अस्मत देखो
कहां लोगों में जज़्बात बाकी है ।
यहां खत्म हो गए नज़ारे सब
कहने को जमाने की बात बाकी है ।
चारों ओर पसरा हुआ अंधेरा है
बिगड़ना अब भी हालात बाकी है ।
मर गई कब की इंसानियत ठाकुर
निकलना जनाजे की बारात बाकी है ।
-अजातशत्रु सिंह
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