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जितने वाले छोड़ते नहीं, छोड़ने वाले जीतते नहीं।

ADITYA RAJ

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जब लोगों ने हारा है, तब तब कोई न कोई आया है।
        
                                                    
                            
जब संकट सामने आड़ा आया, तब पैर बन खड़े पाया।

था बचपन से जुनून कुछ कर दिखाना है,
पर ना था प्रकृति को मंजूर इसको आगे बढ़ाना है।

पिता भाई का हाथ सर से हटा दिया,
मुझे हराने इसने विकट परिस्थिति में डाल दिया।

था मुझे भी उसी सोच, पक्के इरादे के बल पर कड़ी मेहनत करूंगा,
नहीं झुकूंगा नियति के आगे कुछ अलग कर दिखाऊंगा।

शुक्रिया अपने आंगन में निर्धन बच्चों को पढ़ाना, निःशुल्क शिक्षा देकर है उनको आगे बढ़ाना।

कबाड़ से जुगाड़ तरीके से, गणित के सवालों को हल किया,
अपने अद्वितीय शैली को, बोर्ड के अंदर निहित किया।

सैकड़ों रातें भर क्लास पढ़ाकर, उसने गुरुजनों का काम किया।
अर्जुन जैसा साध निशाना, बच्चे ने कृत काम किया।

पाइथागोरस प्रमेय को 50 से अधिक विभिन्न तरीके से सिद्ध किया।
अपना नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में दर्ज किया।।

प्रकृति को भी मानना पड़ा, है सामने कोई रण लिये।
कर बाधा को पार, अपने नाम कई रिकॉर्ड किए।।

बड़ों का आशीर्वाद लेकर, पर्वत को चीर आया।
तेरा सोनू सोने जैसा निखर गया,
यह आर. के. श्रीवास्तव मैथेमेटिक्स गुरु बन छप गया।।


 
2 घंटे पहले
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