विज्ञापन

नयन, नयन की बात निराली, हृदय कहय कछू अधर न आनी

Aditya Dahiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज प्यार की बात करेंगे,
        
                                                    
                            
दिनभर और रात करेंगे,
कोमल कमल पंखुड़ियों पर,
अधर मधुर आघात करेंगे।।

रजनी प्यारी आएंगी,
पिया की याद दिलाएंगी।
यौवन का सारा भर के,
रस मादक मधुर पिलाएंगी।।

रूप अनूप विधाता बनायो,
बिन आभूषण तुम्हें सजायो,
एक सुभग तुम रचना हो,
विधना बहुत विचार बनायो।

कमल पंखुड़ी सम चक्षु है,
कर्णकुंडल केश गुच्छ सुंदर।
दाण्डिम लाली गोल कपोल,
उससे ज्यादा सुंदर बोल।।

कमलमृणाल लचक तन माही,
सूरत आई बसी मन माही।
कर तुम्हरे बने दान के लाने,
मागऊ दान द्वार तोहरे आई।।

नयन, नयन की बात निराली,
हृदय कहय कछू अधर न आनी।
जैसे मीन जिय जिय बिन पानी।
ऐसे प्राण प्रिया बात हमारी।
पर यह सत्य मैं कहहू कुमारी,
दिव्य हो तुम ऐ दिव्याकुमारी।
तुम पे हम जाए सौ बारी वारी।।
-आदित्य दाहिया,
33 मिनट पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7572 कविताएं

View Profile