विज्ञापन

ख़ुद को बर्बाद यूँ कर शेर लिखे जायेंगे

Abhyuday Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बद-दिली से भी यहाँ पेट भरे जायेंगे
        
                                                    
                            
लोग हालत पे तरस खा के चले जायेंगे

ये न सोचा था कि पेड़ों सा हरा दिल रख कर
चंद पैसों के लिए काट दिये जायेंगे

ख़्वाब ये ग़ैर-मुकम्मल न अगर रह जाता
मुमकिना यूँ न था वो कुछ भी कहे जायेंगे

मेरी हालत का नज़ारा भी निराला दुख है
मौत हर ख़्वाब में है फिर भी जिये जायेंगे

यूँ जुनूँ-ख़ेज़ तरीक़ा न लगा ग़ज़लों में
ख़ुद को बर्बाद यूँ कर शेर लिखे जायेंगे
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all