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ख़ुद को बर्बाद यूँ कर शेर लिखे जायेंगे

                
                                                         
                            बद-दिली से भी यहाँ पेट भरे जायेंगे
                                                                 
                            
लोग हालत पे तरस खा के चले जायेंगे

ये न सोचा था कि पेड़ों सा हरा दिल रख कर
चंद पैसों के लिए काट दिये जायेंगे

ख़्वाब ये ग़ैर-मुकम्मल न अगर रह जाता
मुमकिना यूँ न था वो कुछ भी कहे जायेंगे

मेरी हालत का नज़ारा भी निराला दुख है
मौत हर ख़्वाब में है फिर भी जिये जायेंगे

यूँ जुनूँ-ख़ेज़ तरीक़ा न लगा ग़ज़लों में
ख़ुद को बर्बाद यूँ कर शेर लिखे जायेंगे
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17 घंटे पहले

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