नारी चिल्लाएं रोड़ों पर क्या कान तुम्हारे बहरे है...
देश के रक्षक कैसे तुम कैसे द्वार के पहरे है...
नारी की आवाजे क्या तुम तक नहीं पहुंच रही.
उन तस्वीरों को देखने में मां बहने सकुच रंही..
क्या ऐसे हालातो में कोई घर से निकलेगा..
मां बहनों में से कोई क्या दफ्तर तक पहुंचेगा...
जब मां बहने काली बनकर घर से निकलेंगी....
बच के रहना गद्दारों एक-एक के गर्दन पर शामत पहुंचेगी.
उन मां बहनों को रोड़ों पर टहला कर तुमने इंसानियत को ही मार दिया..
देखो अपनी मां बहनों के चेहरों को क्या तुमने उनको यह प्यार दिया..
क्या धर्म तुम्हें सीखता है नारी का अपमान करो...
जिनसे पैदा होकर टहल रहे हो उनका ही अपमान करो..
एक खंड की दुर्घटना अब पुरे भारत मे फैलेगी....
हर एक डगर पर नारी अब तलवार ही लेकर निकलेगी...