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राम-लक्ष्मण विभीषण प्रति मिलाप

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नाथ कर कृपा हम पर, मैं महिदेव पुत्र हूँ,
        
                                                    
                            
आपके रिपु (शत्रु) का मैं अर्जून हूँ।
कृपा करो नाथ हम पर, भक्त की भक्ति देखो,
न क्रोध की भावना आप में, न शत्रुता की आँखें।

विलोक कर कृपा करो नाथ,नाथ!
सरल निष्ठा से अपना भक्त मानो।
नाथ! आप दोनों भाई दे दो मुझको शरण,
नाथ कहते-कहते कब मिलेगी शरण?

विभीषण कहते हैं, नाथ शरण तो—विष्णु के साथ हो।
जहाँ भाई लक्ष्मण सा,
भक्त हनुमान सा,
तीनों देव एक साथ देते दर्शन हैं।

किसी जन्म में न छोड़ूँ,
भक्ति भाव का रस आपकी,
नाथ! करूँ वंदन.......।
एक महीने पहले
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