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हम तो अपनी ही अदाओं के बोझ से

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पुष्प कहूं या फूल,
        
                                                    
                            
ना जाने कितनी दर्द सही है,
इस बातों में,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।

थम जाया कर कहीं रास्ते में ,
कुछ अनहोनी ना हो,
कुछ करने से पहले कुछ कह दिया कर,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।

तुझे पुष्प कहूं या फूल,
अनजानी आंखों को यूं ही ,
एतबार देखा ना कर मेरे मदहोश बातों को,
अनजान समझा ना कर।

कब तक कहूं तुझे मैं ,
तू अपनी है,
अपनी है ,
मैं तुझे अपना जीवन से माना हूं।

तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
रास्ते की हर एक बौछार के ,
उत्पत्ति का उदाहरण ले ले ना।

जाने कब तक कितनी राहों का,
बलाएं कस है ,
हम तो अपनी ही अदाओं के बोझ से ,
तुझे अब ना घेरे।

तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।
एक महीने पहले
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