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हम तो अपनी ही अदाओं के बोझ से

                
                                                         
                            पुष्प कहूं या फूल,
                                                                 
                            
ना जाने कितनी दर्द सही है,
इस बातों में,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।

थम जाया कर कहीं रास्ते में ,
कुछ अनहोनी ना हो,
कुछ करने से पहले कुछ कह दिया कर,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।

तुझे पुष्प कहूं या फूल,
अनजानी आंखों को यूं ही ,
एतबार देखा ना कर मेरे मदहोश बातों को,
अनजान समझा ना कर।

कब तक कहूं तुझे मैं ,
तू अपनी है,
अपनी है ,
मैं तुझे अपना जीवन से माना हूं।

तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
रास्ते की हर एक बौछार के ,
उत्पत्ति का उदाहरण ले ले ना।

जाने कब तक कितनी राहों का,
बलाएं कस है ,
हम तो अपनी ही अदाओं के बोझ से ,
तुझे अब ना घेरे।

तुझे पुष्प कहूं या फूल ,
तुझे पुष्प कहूं या फूल।
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52 मिनट पहले

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