हल्की-हल्की सी जो तुम तसल्ली देते हो,
मेरी ज़िन्दगी के मस्ती का एक अध्याय तुम बंद करते हो।
खिड़की के परदों से,
तुम हमें बार-बार देखते हो।
तुम हमें यूँ ही आँखें, किंतु पलकें घुमा लेते हो,
मेरे दिल की यादों में, तुम याद से आ जाते हो।
मेरा दिल बेचैन है, तेरे दीदार देखने को,
हल्की-हल्की सी जो तुम तसल्ली देते हो।
मेरी ज़िन्दगी के मस्ती का एक अध्याय तुम बंद करते हो,
खिड़की के परदों से,तुम हमें बार-बार देखते हो।