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खिड़की के परदे

                
                                                         
                            हल्की-हल्की सी जो तुम तसल्ली देते हो,
                                                                 
                            
मेरी ज़िन्दगी के मस्ती का एक अध्याय तुम बंद करते हो।

खिड़की के परदों से,
तुम हमें बार-बार देखते हो।

तुम हमें यूँ ही आँखें, किंतु पलकें घुमा लेते हो,
मेरे दिल की यादों में, तुम याद से आ जाते हो।

मेरा दिल बेचैन है, तेरे दीदार देखने को,
हल्की-हल्की सी जो तुम तसल्ली देते हो।

मेरी ज़िन्दगी के मस्ती का एक अध्याय तुम बंद करते हो,
खिड़की के परदों से,तुम हमें बार-बार देखते हो।
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11 घंटे पहले

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