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भीतर ही भीतर, खुद में न जाने क्या बातें कर रहा हूँ।

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन में सब कुछ है,
        
                                                    
                            
जो भी है, मंज़ूर है।
मेरे पास जो कुछ भी है,
बस आपका ही प्यार है।
कोई मेरा ख्याल करे,
यही मेरे लिए सब कुछ है।
अवसाद की जगह ख़त्म कर,
भीतर ही भीतर उत्साह से भर जाता हूँ।
धुआँ है... बस धुआँ है दुनिया की बातें,
पल-पल तेरी याद में गाता हूँ।
पलक झपकते ही दर्जनों लोग आते हैं,
पर तुम नहीं... सदैव की तरह, अब भी नहीं!
क्या मैं अकेला इंतज़ार कर रहा हूँ आपका?
भीगे हुए चने की तरह नर्म होता जा रहा हूँ।
जितना भी प्यार, जितनी भी हताशा है,
सब भीतर भर-भर कर आती है।
झरने से तेज़ हमारे गहन विचार होते जा रहे हैं,
भीतर ही भीतर, खुद में न जाने क्या बातें कर रहा हूँ।
चाँद, सूरज और मैं...
हम बातें नहीं कर सकते।
सच में, जो कुछ भी कर पाऊँ,
वही कह सकता हूँ।
कमज़ोर भी हूँ, पर अत्यधिक नहीं।
बहलाती है मन को, मेरे पास आकर,
खिड़की से आती हुई हवा...
कोई शैतानी नहीं, स्मृतियों से घिरा हुआ हूँ मैं।
जीवन में सब कुछ है,
जो भी है, मंज़ूर है।
- अभिषेक गुप्ता
एक घंटा पहले
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