गाँव हमारा सब से प्यारा,
हरे-भरे खेत और खलिहानों वाला।
आस-पास सुंदर बाग-बगीचा,
स्नेह का अमृत सबने सींचा।
कोई किसी के पास है बैठता,
सुख-दुख में हर कोई हाथ बंटाता।
मैं तो सुबह तालाब की ओर जाता,
प्यारी लहरों का रूप निहारता।
देखूँ मछलियों की सुंदर धार,
मन खुश हो जाता बारम्बार।
फूल-पत्ते महकते हैं कई,
रसीले फलों की बहार नई।
चाहे शाम हो या दोपहर,
पेड़ों के नीचे चटाई बिछती हर पहर।
कई पक्षी यहाँ आकर बैठते,
अपना-अपना मधुर गाना गाते।
फिर अपने द्वार को हैं जाते,
गाँव हमारा सबसे प्यारा कहलाते।