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गाँव हमारा

                
                                                         
                            गाँव हमारा सब से प्यारा,
                                                                 
                            
हरे-भरे खेत और खलिहानों वाला।
आस-पास सुंदर बाग-बगीचा,
स्नेह का अमृत सबने सींचा।

कोई किसी के पास है बैठता,
सुख-दुख में हर कोई हाथ बंटाता।

मैं तो सुबह तालाब की ओर जाता,
प्यारी लहरों का रूप निहारता।
देखूँ मछलियों की सुंदर धार,
मन खुश हो जाता बारम्बार।

फूल-पत्ते महकते हैं कई,
रसीले फलों की बहार नई।

चाहे शाम हो या दोपहर,
पेड़ों के नीचे चटाई बिछती हर पहर।
कई पक्षी यहाँ आकर बैठते,
अपना-अपना मधुर गाना गाते।

फिर अपने द्वार को हैं जाते,
गाँव हमारा सबसे प्यारा कहलाते।
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46 मिनट पहले

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