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मैं किताब हूँ!!

Abhidat Arunkumar Fale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चुप रहती हूँ, मौन हूँ मैं,
        
                                                    
                            
फिर भी ज्ञान का स्रोत हूँ मैं।
मेरे पन्ने खोल के देखो,
सपनों से तुम बोल के देखो।

कहीं कहानी, कहीं विज्ञान,
कहीं छिपा इतिहास महान।
कहीं सितारों की है बात,
कहीं सफलता की सौगात।

राजा, रानी, चाँद, सितारे,
मेरे अंदर रहते सारे।
सागर, पर्वत, धरती, गगन,
मेरे पन्नों में है जग मगन।

मोबाइल तुमको खूब लुभाए,
पल-पल नई तस्वीर दिखाए।
मैं ना चमकूँ स्क्रीन समान,
पर चमका दूँ तुम्हारा ज्ञान!

जब भी मन हो थोड़ा उदास,
आकर बैठो मेरे पास।
मैं दूँगी सपनों को उड़ान,
मैं बन जाऊँगी पहचान।

मुझसे दोस्ती करके देखो,
ज्ञान की दुनिया पढ़कर देखो।
कलम तुम्हारी, मैं आधार—
पढ़ना है सबसे सुंदर उपहार!

किताब कहे बस इतनी बात—
“ज्ञान रहेगा जीवन भर साथ!”
10 घंटे पहले
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