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मय और माशूका

Abhash Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसे कैसे आपने मय को कहा ख़राब
        
                                                    
                            
आइये जरा मेरे पास तो बैठिए जनाब

सुना है आप भी दिल में गम लिए फिरते है
तो फिर लीजिए एक हाथ ग्लास दूसरे में शराब।

यूं न करिए हमसे पीने पिलाने की बातें
उसे बिल्कुल पसन्द नहीं पीना मेरा शराब।

आप भी लगता है माशूका की बातों में आ गए
जाईए,फिर तुले है बर्बाद करने को अपना शबाब।

शराब से ज्यादा नशा है मेरी माशूका की आंखों में
जो एक बार देख लूं,तो होता है नशा बेहिसाब।

चार दिन की चांदनी है माशूका फिर अंधेरी रात
आफताब के रौशनी के आगे छुप जाता है महताब।

देखिए अपने आप को कंप रहें है आपके हाथ
चलिए इस मयखाने से वरना मर जाएंगे आप।

 
11 महीने पहले
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