ऐसे कैसे आपने मय को कहा ख़राब
आइये जरा मेरे पास तो बैठिए जनाब
सुना है आप भी दिल में गम लिए फिरते है
तो फिर लीजिए एक हाथ ग्लास दूसरे में शराब।
यूं न करिए हमसे पीने पिलाने की बातें
उसे बिल्कुल पसन्द नहीं पीना मेरा शराब।
आप भी लगता है माशूका की बातों में आ गए
जाईए,फिर तुले है बर्बाद करने को अपना शबाब।
शराब से ज्यादा नशा है मेरी माशूका की आंखों में
जो एक बार देख लूं,तो होता है नशा बेहिसाब।
चार दिन की चांदनी है माशूका फिर अंधेरी रात
आफताब के रौशनी के आगे छुप जाता है महताब।
देखिए अपने आप को कंप रहें है आपके हाथ
चलिए इस मयखाने से वरना मर जाएंगे आप।
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