मैं तेरे रंग में रंग गया हूँ,
पर इस रंग में रंग नया हूँ।
फ़िक्र न कर, तेरी आँखों से,
तेरे दिल में उतर गया हूँ।
लेकिन ख़ुद को अगर मैं ढूँढूँ,
कहाँ मैं ढूँढूँ, बिखर गया हूँ।
ख़ुद में ढूँढा, मिला न ख़ुद में,
बता दे मुझको किधर गया हूँ।
न पेड़-पौधों, न फूल-पत्तियों,
न बूँद में, न सागर-नदी में।
कहीं भी अब मैं नहीं रहा हूँ,
जब से तुझमें उतर गया हूँ।
कभी भी मन में न ख़याल लाना,
कि सच में तुझमें उतर गया हूँ।
मैं तेरे अंदर लहर-सा उठकर,
फिर से तुझमें ही गिर गया हूँ