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उतर गया हूं

                
                                                         
                            मैं तेरे रंग में रंग गया हूँ,
                                                                 
                            
पर इस रंग में रंग नया हूँ।
फ़िक्र न कर, तेरी आँखों से,
तेरे दिल में उतर गया हूँ।

लेकिन ख़ुद को अगर मैं ढूँढूँ,
कहाँ मैं ढूँढूँ, बिखर गया हूँ।
ख़ुद में ढूँढा, मिला न ख़ुद में,
बता दे मुझको किधर गया हूँ।

न पेड़-पौधों, न फूल-पत्तियों,
न बूँद में, न सागर-नदी में।
कहीं भी अब मैं नहीं रहा हूँ,
जब से तुझमें उतर गया हूँ।

कभी भी मन में न ख़याल लाना,
कि सच में तुझमें उतर गया हूँ।
मैं तेरे अंदर लहर-सा उठकर,
फिर से तुझमें ही गिर गया हूँ

 
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2 महीने पहले

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