विज्ञापन

इसे न रायगां करो

Abdul Hameed

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समय के साथ ही रहो
        
                                                    
                            
ज़रा पकड़ रविश चलो

रुको नहीं झुको नहीं
चले चलो चले चलो

समय बहुत है क़ीमती
इसे न रायगां करो

करो न भूल कर कभी
चलन अगर न आम हो

हदफ़ से दूर हो अभी
ज़रा कहीं रुको नहीं
-हमीद कानपुरी
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile