हम तुम्हें ढूॅंढते रहे और उम्र कट गई मगर तुम न मिले!
ज़िंदगी जीने की हसरत लिए हम तो दुनिया से चले!!
गर फिर जन्म लेंगे तो इस ख़ुश-नसीबी के साथ सनम!
सुबह हो तेरी पलकों तले तेरी ज़ुल्फ़ों तले शाम ढले!!
- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद