यूँ लहराती ज़ुल्फ़ों से हमारा दिल चुराया न करो,
महकती फ़िज़ाओं में इश्क़ वाला ज़हर मिलाया न करो।
लबों की ख़ामोशी भी क़यामत-सी लगती है तुम्हारी,
यूँ हर बार नज़रों से मोहब्बत जताया न करो।
धड़कनों ने तुम्हारा नाम इबादत-सा लिख रखा है,
यूँ बेवजह दिल को और तड़पाया न करो।
अगर मुकम्मल हो सके, तो उम्र भर साथ निभाना,
वरना ख़्वाब बनकर हर रात आया न करो।
तुम्हारी याद का मौसम बहुत देर ठहर जाता है,
यूँ हर आहट में अपना एहसास जगाया न करो।
इश्क़ अगर सच है तो हाथ थामे रखना आख़िर तक,
यूँ आधे रास्ते में किसी को तन्हा छोड़कर न जाया करो।