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इश्क़ वाला ज़हर

Aakash Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूँ लहराती ज़ुल्फ़ों से हमारा दिल चुराया न करो,
        
                                                    
                            
महकती फ़िज़ाओं में इश्क़ वाला ज़हर मिलाया न करो।

लबों की ख़ामोशी भी क़यामत-सी लगती है तुम्हारी,
यूँ हर बार नज़रों से मोहब्बत जताया न करो।

धड़कनों ने तुम्हारा नाम इबादत-सा लिख रखा है,
यूँ बेवजह दिल को और तड़पाया न करो।

अगर मुकम्मल हो सके, तो उम्र भर साथ निभाना,
वरना ख़्वाब बनकर हर रात आया न करो।

तुम्हारी याद का मौसम बहुत देर ठहर जाता है,
यूँ हर आहट में अपना एहसास जगाया न करो।

इश्क़ अगर सच है तो हाथ थामे रखना आख़िर तक,
यूँ आधे रास्ते में किसी को तन्हा छोड़कर न जाया करो।

 
3 महीने पहले
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