मेरी रचना का शीर्षक है-
क्यों लगे प्रतिबंध -16
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कहने को हम हैं सामाजिक प्राणी
तिथि त्यौहारों पर होते हैं अनाड़ी
सरकारी मौलाना ने फतवा सुनाया
त्योहारों पर छुट्टी को बंद करवाया
रेलवे में मिलते हैं, रनिंग कर्मचारी
नौकरी को करना बड़ी जिम्मेदारी
होली दिवाली, मिली न कोई छुट्टी
अपने बीबी बच्चे से हो जाए कुट्टी
प्रशासन के आगे कर्मचारी लाचार
काम के बोझ तले होते अत्याचार
क्यूं लगाते हो आखिर ऐसे प्रतिबंध
कानून के विरुद्ध रहें पक्के सम्बंन्ध
छुट्टियों के प्रतिबंध से आती दुर्गन्ध
कानून के लिवास की खाते सौगंध
कवि- पं. अमरेश उपाध्याय
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