मेरी रचना का शीर्षक है-
शहीद हुए भगवाधारी-
जो हुए थे शहीद आज कहलाते हैं भगवाधारी
मातृभूमि पर मर-मिटने की थी उनको बीमारी
बड़ा ही कलेजा है भगवाधारी अंध भक्तों का
हौसला रखते हैं विरोधियों के व्यंग सुनने का
जिनके लिए स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रधर्म हो सर्वोपरि
ईनाम में मिलता रहा जिनको हत्या और दुत्कारि
वही वतन के वास्ते जो फौलाद बन जाते हैं
दुनिया में मां भारती की औलाद कहलाते हैं
बेरहम दुश्मनों का हम सितम झेलते आए हैं
जन्म भूमि के सम्मान में कुर्बान होते आए हैं
भूल से कुछ बोल दिया फतवा जारी हो गया
खतरनाक से खतरनाक हमला भारी हो गया
मातृभूमि के रखवाले को हत्यारा करार दिया
लुच्चे और लफंगे को सेवक प्रथम बना दिया
जागा था भाग्य देश का फिर उसे सुला दिया
हिन्द के शहीदों को एक झटके में भुला दिया
आजादी का मकसद सिर्फ सत्ता है सिखला दिया
आजादी के मतवालों को कभी नही सम्मान दिया
कवि- पं. अमरेश उपाध्याय
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।