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मेरी संगिनी

Shikhar Vishwakarma

Mai Inka Mureed
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                            हर रोज़ की तरह आज भी मैं, अपने पसन्दीदा कैफ़े में कोनें की कुर्सी पकड़ कर उसका इंतज़ार कर रहा था।
        
                                                    
                            


आज उसे आने में ज़रा देर जरूर हुई , पर अब, अब वो मेरे आंखों के ठीक सामने थी।

मैं उसे देखकर बस मन ही मन खुश होता रहा।


जी हाँ वो ज़रा साँवली जरूर लग रही है मग़र सफेद रंग का हिज़ाब दिल छू गया।


इच्छा तो थी, के पहली नज़र देखते ही उसे होंठो से लगा लूँ पर परेशानी ये थी कि आज वो गुस्से में थी, उसका मिजाज़ गर्म था।


इस गुस्से में वो बेहद खूबसूरत दिख रही थी,उसकी आंखों की गर्मी देख मुझसे रहा न गया।


और बस थोड़ी ही देर में उसे मैंने अपने होठो से लगा लिया और अपने दिल की प्यास बुझा ली,


धीरे धीरे से उसको पीता गया, अब मेरे हाथ खाली थे, और टेबल पर रखा था तो बस

वो सफ़ेद खाली कप...


मेरी मोबब्बत *चाय* मेरी प्यास बुझाने मे खुद क़ुर्बान हो गयी।


चाय….

©शिखर

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8 वर्ष पहले
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