विज्ञापन

कफ़न मिले तो आंचल मेरी माँ का हो

Sant Prasad

Mai Inka Mureed
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            आँख खोलू तो चेहरा मेरी माँ का हो
        
                                                    
                            
आँख बंद हो तो सपना मेरी माँ का हो
मैं मर भी जाऊं तो भी कोई गम नहीं
लेकिन कफ़न मिले तो आंचल मेरी माँ का हो!!

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all