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मनोहारी कलरव के साथ गम का अंतहीन विस्तार

शरद मिश्र

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  लता की सुरीली आवाज में यह गीत ताल ठोंक के कहता है कि इश्क करो और गम को गले लगाओ जिससे अंत में कुछ मिले ना मिले पर आपको अनंत गगन में खोने की ललक तो अवश्य मिल जाएगी। एैसी ललक मिलने के बाद आप सब पा सकते हैं । यहां तक आप अपनी खोई प्रतिष्ठा भी समाज से हासिल कर सकते हैं ।     
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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आंखों के हाव भाव के साथ नृत्य गीत में समां बांधता है...

सेहरा फिल्म में नायिका संध्या का पंख होती तो उड़ आती रे गीत पर आंखों के हाव भाव के साथ नृत्य गीत में समां बांधता है । गीत को सुनकर औरदेखकर लगता है कि वास्तव में संध्या अपने प्रियतम के गम में झुलस गई है । वह इसमें कोई अभिनय नहीं कर रही है । बेजोड़ संगीत और मधुर बोल के साथ संध्या का नृत्य मुझे इस गीत का मुरीद बनाता है । 1963 में रिलीज सेहरा फिल्म के इस गीत को हसरत जयपुरी ने लिखा तथा इसमें संगीत की मधुर लहरियां बिखेरी थी रामलाल ने जिन्हें बांसुरी और शहनाई बजाने में महारथ हासिल थी ।  

संध्या का दोनों हाथों से दुख व्यक्त करना तो गीत का सार है...

गीत के बीच बीच में पक्षी का मनोहारी कलरव संध्या के गम की एक अंतहीन सीमा को दर्शाता है । संध्या का दोनों हाथों से दुख व्यक्त करना तो गीत का सार है  नाचते हुए गम का वर्णन जिस तरह से इस गीत में किया गया है वैसा आपको अन्यत्र कहीं नहीं मिलता है । 
 

आधा अधूरा डूबना आदमी काे कहीं का नहीं छोड़ता...

गीत के शुरू में ही पक्षियों की उनमुक्त उड़ान विरह या गम को ऊर्जा देने के लिए काफी है । गीत सुनकर लगता है कि आसमान में और ऊंचे उड़कर इश्क के गम की सीमा ही जानने की कोशिश की जाए जो शायद संध्या कर रही है। संघ्या का मुमताज के साथ जुगल बंदी करते हुए यह कहना कि तुझे दिल का दाग दिखलाती... जो तूने दिया है । तूने तो मुझे वादे का झूला खूब झुलाया और फिर अपना वादा भूला जिससे मुझे यह गम मिला । यादों में खोने के बाद आदमी को बहुत कुछ मिलता है लेकिन इसके लिए ढंग से इश्क करना पड़ेगा और उसमें पूरी तरह डूबना पड़ेगा। आधा अधूरा डूबना आदमी काे कहीं का नहीं छोड़ता और तो और वह लोगों को इश्क को महज एक कोरी कल्पना बोलने का मौका भी दे देता है । 

संघ्या इस गीत में गम को एक उपहार समझती है...

इस गीत को सुनने के बाद कोई आशिक अपने गम को गीत में दिखलाए गए पक्षियों की उड़ान से जोड़ते हुए मस्त गगन का विस्तार दे दे तो वह मानव समूह के लिए एक सृजन हो सकता है और इश्क को इससे एक सकारात्मक दिशा मिल सकती है । संघ्या इस गीत में गम को एक उपहार समझती है और जल तरंग की मधुर घ्वनि को मेहनत करने के लिए प्रेरणा मान रही है। गीत इतना मधुर बन पड़ा है कि उसे सुनने और देखने के दौरान एक लयता बनी रहती है ।   

कोई भी काम पूरा करने के लिए आपको बड़ा जतन करना होता है...

आज के दौर में लोग इश्क से डरते हैं लेकिन इसमें पड़कर भी जिंदगी में आगे जाने की कोशिश की जा सकती है । इस कोशिश में अगर आपको अकेलापन महसूस होने लगे तो इसे समझने की कोशिश करें अगर समझ गए तो फिर आपको संध्या की तरह ही विरह की मस्त उड़ान मिल जाएगी और आप कुछ बड़ा कर जाएंगे । गीत आपको इसके लिए साहस और हिम्मत दे  सकता है।कोई भी काम पूरा करने के लिए आपको बड़ा जतन करना होता है । लेकिन अगर आप जीवन में कुछ पाना चाहें तो आपको फिर संध्या की तरह गम में भी मदमस्त होना होगा तभी आपको अनंत गगन में खोने की ललक मिलेगी ।  
5 वर्ष पहले
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