इसी लिए तो यहाँ अब भी अजनबी हूँ मैं
तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूँ मैं
- बशीर बद्र
प्यार की चाँदनी में खिलते हैं
दश्त-ए-इंसानियत के फूल हैं हम
- मसूद मैकश मुरादाबादी
आदमी के पास सब कुछ है मगर
एक तन्हा आदमिय्यत ही नहीं
- जिगर मुरादाबादी
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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
- निदा फ़ाज़ली
रखते हैं जो औरों के लिए प्यार का जज्बा
वो लोग कभी टूट कर बिखरा नहीं करते
- अज्ञात
कुछ मेरे बाद और भी आएंगे काफिले,
कांटे यह रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं
- तसव्वुर किरतपुरी
आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़
- हफ़ीज़ जौनपुरी
आसमानों से बरसता है अंधेरा कैसा?
अपनी पलकों पे लिए जश्ने-चिरागां चलिए
- अली सरदार जाफ़री
आपसे झुक के जो मिलता होगा,
उसका कद आपसे ऊंचा होगा।
- अहमद नदीम कासमी
मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं
- मीर तक़ी मीर
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
- बशीर बद्र
इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब्र से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूं
- मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी
नई मंज़िल नया जादू उजाला ही उजाला
दूर तक इंसानियत का बोल-बाला
- मोहम्मद अली असर
मेरी रुस्वाई के अस्बाब हैं मेरे अंदर
आदमी हूँ सो बहुत ख़्वाब हैं मेरे अंदर
- असअ'द बदायुनी
ज़मीं ने ख़ून उगला आसमाँ ने आग बरसाई
जब इंसानों के दिल बदले तो इंसानों पे क्या गुज़री
- साहिर लुधियानवी