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'उम्र' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

deepali agrawal

Kavya Charcha
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उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
- अज्ञात


मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट
तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच
- एजाज़ गुल

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आदमियत के सिवा जिस का कोई मक़्सद न हो
उम्र भर उस आदमी की जुस्तुजू करते रहो
- अनवर साबरी


हमेशा मैं ने गरेबां को चाक चाक किया
तमाम उम्र रफ़ूगर रहे रफ़ू करते
- हैदर अली आतिश

तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
- सलीम कौसर


सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है
- शकील जमाली

इक उम्र के बा'द मुस्कुरा कर
तू ने तो मुझे रुला दिया है
- अहमद नदीम क़ासमी


मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है
- जोश मलीहाबादी

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा
- अनवर शऊर


मैं शीशा क्यूँ न बना आदमी हुआ क्यूँकर
मुझे तो उम्र लगी टूट फूट जाने तक
- इफ़्तिख़ार नसीम

हंसने-हंसाने पढ़ने-पढ़ाने की उम्र है
ये उम्र कब हमारे कमाने की उम्र है
- अज़हर फ़राग़


अब वो कहीं और मैं हूँ कहीं
उम्र कटेगी तन्हा तन्हा
- शोज़ेब काशिर

दिन ख़ुशी के निकाल कर देखे
उम्र का हर बरस उदासी है
- जुनैद अख़्तर


वो क्या था जिसे हम ने ठुकरा दिया
मगर उम्र भर हाथ मलते रहे
- बशीर बद्र

6 वर्ष पहले
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