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'श्रद्धांजलि और याद' पर ये हैं 10 चुनिंदा शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो इस दुनिया से रुख़्सत होने के बाद अपने पीछे अपना प्रभावी इतिहास छोड़ जाते हैं और उनकी यादें हमेशा दिलो-दिमाग में घर किए होती हैं। दिवंगत भाजपा नेता और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर (जिनकाका लंबी बीमारी के बाद रविवार शाम को निधन हो गया, वह 63 साल के थे। ) ऐसे ही व्यक्ति थे। शायरों ने हमेशा ऐसे नायकों की यादों और अपनी संवेदनाओं को लफ़्जों से नवाजा है। पेश है श्रद्धांजलि स्वरूप याद्गार अशआर... 


उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें 
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए 
~हैदर अली आतिश

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा 
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा 
~परवीन शाकिर
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कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई 
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए 
~रहमान फ़ारिस

अब नहीं लौट के आने वाला
घर खुला छोड़ के जाने वाला
~अज्ञात
 

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई 
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया 
~ख़ालिद शरीफ़

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
~अल्लामा इक़बाल

मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों 
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं 
~मीर तक़ी मीर

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई 
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई 
~कैफ़ी आज़मी

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई 
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया 
~ख़ालिद शरीफ़

लोग अच्छे हैं बहुत दिल में उतर जाते हैं 
इक बुराई है तो बस ये है कि मर जाते हैं 
~रईस फ़रोग़
7 वर्ष पहले
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SUNIL NAYI

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