कईयों के लिए जिंदगी एक ख्वाब है। वहीं कई लोगों को इसकी तल्ख हकीकत का गहरा एहसास है। ख्वाब और हकीकत के बीच जिंदगी को सटीक ढंग से बयां करने वाले 18 शेर हम आपकी नजर कर रहे हैं। उम्मीद है यह आपको पसंद आएंगे।
ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ए दोस्त
वो तेरी याद में हो या तुझे भुलाने में
-फ़िराक़ गोरखपुरी
इसी फरेब में सदिया गुज़ार दीं हमने
गुज़िश्ता साल से शायद ये साल बेहतर हो
-मेराज फैज़ाबादी
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मुख़ालफ़त से मेरी शख़्सिय संवरती हैं
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतराम करता हूं
-बशीर बद्र
आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है
-हैदर अली जाफ़री
ज़माना बड़े शौक से सुन रहा था
हमीं सो गए दास्तां कहते-कहते
-साकिब लखनवी
कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नज़र नहीं आती
-ग़ालिब
वो आये हैं पशेमां लाश पर अब
तुझे अय ज़िंदगी लाऊं कहां से
-मोमिन
बहुत कुछ पांव फैलाकर भी देखा शाद दुनिया में
मगर आखिर जगह हमने न दो गज के सिवा पायी
-वशाद अज़ीमाबादी
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन
बहुत बे आबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले
-ग़ालिब
ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की कबा है जिसमें
घर घड़ी दर्द के पैबन्द लग जाते हैं
-फैज़ अहमद फैज़
नतीजा एक ही निकला कि थी किस्मत में नाकामी
कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये
-आरज़ू लखनवी
उम्रे दराज मांगकर लाये थे चार दिन
दो आरज़ू में कट गए, दो इंतज़ार में
-ज़फ़र
जिनके आंगन में अमीरी का शजर लगता है
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है
-अंजुम रहबर
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया
-फ़रियाद आज़र
ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी
-साग़र सिद्दीक़ी
इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ
जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से
-साहिर लुधियानवी
कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे
तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा
-अहमद फ़राज़
उसी को कहते हैं जन्नत उसी को दोज़ख़ भी
वो ज़िंदगी जो हसीनों के दरमियां गुज़रे
-जिगर मुरादाबादी